भारतीय मौद्रिक नीति

भारतीय मौद्रिक नीति भारतीय मौद्रिक नीति के दो स्पष्ट उद्देश्य निम्नलिखित हैं- (a) आर्थिक विकास को तेज करना; और (b)

Posted on Aug 21, 2017 08:46 IST in Banking & Financial Awareness.

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भारतीय मौद्रिक नीति

भारतीय मौद्रिक नीति के दो स्पष्ट उद्देश्य निम्नलिखित हैं-

(a) आर्थिक विकास को तेज करना; और

(b) मुद्रास्फीतिकारी दबावों को नियंत्रित करना

भारतीय रिज़र्व बैंक मौद्रिक नीति को लागू करने की मुख्य एजेंसी है। भारतीय रिज़र्व बैंक  द्वारा स्थिर मौद्रिक नीति प्राप्त करने के लिए प्रयुक्त किए उपायों में निम्नलिखित शामिल हैं-

बैंक दर


यह वो दर है जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक विनिमय के बिलों पर दोबारा कमीशन लेता है व्यवहार्यत:, यह वह दर है जिस पर भारतीय रिज़र्व बैंक अन्य वाणिज्यिक बैंकों को ऋण देता है। अत: यह मौद्रिक नीति अर्थव्यवस्था के एक संकेत के रूप में कार्य करती है।

आरक्षित नकदी निधि अनुपात (सी.आर.आर - CRR)


प्रत्येक वाणिज्यिक बैंक को भारतीय रिज़र्व बैंक के पास (या तो नकदी अथवा बही शेष) अपनी माँग और आवधिक देयताओं (जमा - Deposits) का कुछ प्रतिशत रखना अपेक्षित होता है। भारतीय रिज़र्व बैंक को 3 से 15 प्रतिशत के बीच सी आर आर निर्धारित करने का अधिकार है।

सार्वधिक चलननिधि अनुपात (एस. एल. आर. - SLR)


वाणिज्य बैंकों द्वारा अपनी कुल माँग और आवधिक देयताओं (एन. डी. सी. एल.) का कुछ प्रतिशत (सी. आर. आर के अतिरिक्त) नकद, सोना और अनुमोदित प्रतिभूतियों की अवस्था में नकद (लिक्विड) परिसम्पत्तियों के रूप में रखना भी अपेक्षित होता है।

भारतीय रिज़र्व बैंक

भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 केअंतर्गत 1 अप्रैल, 1935 को हुई थी और एक जनवरी, 1949 को इसका राष्ट्रीयकरण किया गया। रिज़र्व बैंक के उद्देश्य इस प्रकार हैं-बैंक नोट जारी करने का एकमात्र अधिकार, देश का विदेशी मुद्रा भंडार रखना, मुद्रा और ऋण प्रणाली का परिचालन करना ताकि देश में मुद्रा की स्थिरता बनी रहे और देश के आर्थिक व सामाजिक उद्देश्यों और नीतियों को ध्यान में रखते हुए देश के वित्तीय ढाँचे का सुदृढ़ तरीके से विकास करना। रिज़र्व बैंक भारत सरकार, राज्य सरकारों, वाणिज्यिक बैंकों, राज्य सहकारी बैंकों और कुछ वित्तीय संस्थाओं के बैंकर के रूप में कार्य करती है।

 

भारत में बैंकिंग


भारत में बैंकिंग का इतिहास काफी प्राचीन है। भारतीयों द्वारा स्थापित प्रथम बैंकिंग कंपनी अवध कॉमर्शियल बैंक (1881) थी। 1940 के दशक में 588 बैंकों की असफलता के कारण कड़े नियमों की जरूरत महसूस की गई। फलस्वरूप बैंकिंग कंपनी अधिनियम फरवरी 1949 में पारित हुआ, जो बाद में बैंकिंग नियमन अधिनियम के नाम से संशोधित हुआ।

19 जुलाई, 1969 को 14 प्रमुख बैंकों (जिनमें जमा राशि 50 करोड़ रु. से अधिक थी) का राष्ट्रीयकरण किया गया। बाद में अप्रैल 1980 में 6 और बैंकों का भी राष्ट्रीयकरण किया गया। राष्ट्रीयकरण के बाद के तीन दशकों में देश में बैंकिंग प्रणाली का असाधारण गति से विस्तार हुआ- भौगोलिक लिहाज से भी और वित्तीय विस्तार की दृष्टि से भी। 14 अगस्त, 1991 को एक उच्च-स्तरीय समिति वित्तीय प्रणाली के ढांचे, संगठन, कामकाज और प्रक्रियाओं के सभी पहलुओं की जाँच करने के लिए नियुक्त की गई। एम. नरसिंहम की अध्यक्षता में बनी इस समिति की सिफारिशों के आधार पर 1992-93 में बैंकिंग प्रणाली में व्यापक सुधार किए गए।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पास सोने का दुनिया में 10वां सबसे बड़ा भंडार है। नवंबर 2009 में रिजर्व बैंक ने 6.7 अरब अमेरिकी डॉलर की लागत से अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से 200 मीट्रिक टन सोने की खरीद की थी। इस खरीद से उसके विदेशी मुद्रा कोष में गोल्ड होल्डिंग्स की हिस्सेदारी बढ़ गई है। पहले गोल्ड होल्डिंग्स की हिस्सेदारी इसमें 4 प्रतिशत थी जो अब बढ़कर 6 प्रतिशत हो गई है।

आज बैंकिग क्षेत्र में कई तरह की निर्णायक शक्तियां काम कर रही हैं। जिसमें आरबीआई, वित्त मंत्रालय, वित्तीय नियामक शक्तियां आदि प्रमुख भूमिका निभाती हैं। आज देश में बैंकिंग सेक्टर 20 फीसदी प्रति वर्ष की दर से बढ़ रहा है। जिसमें इक्विटी रिटर्न 18 फीसदी के आस पास है। मैक्निजे के एक अध्ययन के मुताबिक आज देश के तेज औद्योगिक विकास, कॉरपोरेट दुनिया की बढ़ी जरूरतों के बीच बैकिंग सेक्टर भी तेजी से ग्रो कर रहा है। 2010-11 वित्तीय वर्ष के दौरान देश में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंको की क्रेडिट ग्रोथ 22.44 प्रतिशत दर्ज की गई। वहीं इन बैंको का शुद्ध लाभ पिछले वर्ष के 39 हजार करोड़ रूपए की तुलना में बढ़कर 45 हजार करोड़ हो चुका है। कुल डिपॉजिट का 52.2 प्रतिशत हिस्सा राष्ट्रीयकृत बैंकों के पास है, जिसमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया व उसके एसोसिएट बैंको के पास कुल डिपॉजिट का 22.1 फीसदी है। वहीं देश की प्रुमख प्राइवेट सेक्टर बैंक, विदेशी बैंक, पुरानी निजी क्षेत्र की बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक का हिस्सा क्रमश: 13.3, 4.8, 4.6 व 3 फीसदी दर्ज किया गया।

प्रभावी पूंजी उत्पादक क्षमता के चलते इस सेक्टर में इन दिनों खासी रौनक देखी जा रही है। जहां कैपिटल एडीक्वेसी रेशियो 14 फीसदी के आस पास है। बड़ी मात्रा में जमा राशियों के चलते यहां तरलता अनुपात भी स्वस्थ माना जा रहा है।

  1. मार्च 2000 से मार्च 2010 के बीच बैंकिंग सेक्टर में कुल जमा राशियों में पांच गुने से ज्यादा की बढ़ोत्तरी हुई। (250 बिलियन डॉलर से बढ़कर 1.3 ट्रिलियन)

  2. पिछले पांच वर्षो में इस क्षेत्र में लगातार उछाल दर्ज की जा रही है। जिसमें वार्षिक क्रेडिट ग्रोथ रेट 23 फीसदी के आस पास है। जहां लाभ की दर 15 प्रतिशत है।

  3. भारतीय बैंकिंग सेक्टर में इन दिनों बड़े खिलाड़ियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। आज देश के टॉप 10 बैंकों की देश के कुल 57 फीसदी बैंकिंग करोबार पर कब्जा है। (मार्च 2011 तक )।


4.अलग अलग बैंकों की बात करें तो देश के कुल राष्ट्रीयकृत बैंकों का हिस्सा कुल जमा में करीब 52.2 प्रतिशत है। जिसमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया 22.1 प्रतिशत के साथ शीर्ष पर है। यहां पर प्राइवेट बैंक, विदेशी बैकों, पुराने निजी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का हिस्सा क्रमश: 13.3 फीसदी, 4.8, 4.6 प्रतिशत है। (आरबीआई के अनुसार)

रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की देश में कुल 34,709 शाखाएं हैं।

 

पूंजी पर्याप्तता अनुपात


भारतीय बैंकिंग प्रणाली ने ग्लोबल आर्थिक संकट का डटकर मुकाबला किया है। यह उसके सुधरे हुए पूंजी पर्याप्तता अनुपात से जाहिर होता है। मार्च 2009 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के पूंजी पर्याप्तता अनुपात में 13.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई। जबकि भारतीय रिजर्व बैंक के आदेशों के अनुसार इसे कम-से-कम 9.0 प्रतिशत होना अनिवार्य है।



भारत में अनुसूचित बैंकों की सूची


- इलाहाबाद बैंक (देश की सबसे पुरानी सार्वजनिक क्षेत्र की बैंक)

- आंध्र बैंक

- बैंक ऑफ बड़ौदा

- बैंक ऑफ इंडिया

- बैंक ऑफ मदुरा

- बैंक ऑफ महाराष्ट्र

- बैंक ऑफ पंजाब

- बैंक्यू नेशनाले डि पेरिस-इंडिया- ग्लोबल बैंक जो कार्पोरेट व विदेशी संस्थागत निवेशकों को सेवा प्रदान करती है

- केनरा बैंक

- सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (एक वाणिज्यिक बैंक जो क्रेडिट, डिपॉजिट और इंटरनेशनल बैंकिंग सुविधा उपलब्ध कराती है)

- सेंचुरियन बैंक लिमिटेड

- सेंचुरियन बैंक

- सिफर सिक्योरिटीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (यह एक इन्वेस्टमेंट बैंक है जो प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल के द्वारा फंड इकठ्ठा करती है)

- सिटी बैंक (एक ग्लोबल कन्ज्यूमर बैंक है)

- कार्पोरेशन बैंक

- कॉस्मोस बैंक (मल्टीस्टेट सिड्यूल्ड कोऑपरेटिव की सेवाएं प्रदान करती है)

- देना बैंक

- डेवलपमेंट क्रेडिट बैंक

- एक्जिम बैंक अथवा एक्पोर्ट (इम्पोर्ट बैंक ऑफ इंडिया)

- फेडरल बैंक लिमिटेड

- गार्जियन सहकार बैंक नियामिता (समाज के कमजोर वर्र्गों को वित्तीय सेवा व लोन प्रदान करने वाली कोऑपरेटिव बैंक)

- ग्लोबल ट्रस्ट बैंक (प्राइवेट बैंकिंग फर्म)

- एचडीएफसी बैंक लिमिटेड (अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक जो नेट बैंकिंग और कंज्यूमर लोन के क्षेत्र में सक्रिय है)

- हरियाणा स्टेट कोऑपरेटिव एपेक्स बैंक लिमिटेड

- आईसीआईसीआई बैंक (द इंडस्ट्रियल क्रेडिट एंड इन्वेस्टमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड ऑफ इंडिया)

- आईडीबीआई बैंक (आईडीबीआई और सिडबी द्वारा प्रोमोट की जाने वाली प्राइवेट सेक्टर बैंक)

- इंडियन बैंक

- इंडियन ओवरसीज बैंक

- इंडसइंड बैंक लिमिटेड (प्रमुख प्राइवेट सेक्टर बैंकिंग कंपनी)

- इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (औद्योगिक और वित्तीय वृद्धि को प्रोमोट करने वाली बैंक)

- इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट बैंक ऑफ इंडिया लिमिटेड (आईआईबीआई)

- जम्मू-कश्मीर बैंक

- जम्मू-कश्मीर बैंक लिमिटेड (निजी क्षेत्र की बैंक)

- कल्याण बैंक

- कपोल कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड

- लक्ष्मी विलास बैंक

- मांडवी कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (कोऑपरेटिव सेक्टर का बैंकिंग संगठन)

- नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलरमेंट (कृषि क्षेत्र को ऋण उपलब्ध कराने वाली बैंक)

- नेशनल हाउसिंग बैंक (गृह वित्त संस्थानों को प्रोमोट करने वाली बैंक)

- ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (मर्र्चेंट बैंकिंग, अनिवासी भारतीयों को सेवा देने वाली और रूरल बैंकिंग के क्षेत्र में सक्रिय राष्ट्रीयकृत बैंक)

- पंजाब नेशनल बैंक

- पंजाब एंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक प्राइवेट लिमिटेड

- पंजाब एंड सिंध बैंक

- रत्नाकर बैंक लिमिटेड (नेट बैंकिंग और लॉकर सुविधा देने वाली बैंक)

- सारस्वत कोऑपेरटिव बैंक लिमिटेड (कार लोन देने वाली अनुसूचित बैंक)

- एसबीआई कैपीटल मार्केट्स लिमिटेड

- स्माल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (लघु उद्योगों को ऋण देने वाला बैंक)

- स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद

- स्टेट बैंक ऑफ इंडिया

- स्टेट बैंक ऑफ इंदौर

- स्टेट बैंक ऑफ मैसूर

- स्टेट बैंक ऑफ सौराष्ट्र

- स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर

- सिंडीकेट बैंक

- यूनाईटेड कॉमर्शियल बैंक

- यूनियन बैंक ऑफ इंडिया

- यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया

- यूनाईटेड बैंक ऑफ इंडिया

- विजया बैंक

 

निजी बैंक


वर्ष 1993 में बैंकिंग प्रणाली में अधिक उत्पादकता और कुशलता लाने के लिए भारतीय बैंकिंग प्रणाली में निजी क्षेत्र को नए बैंक खोलने की अनुमति दी गई। इन बैंकों को अन्य बातों के साथ निम्नलिखित न्यूनतम शर्तों को पूरा करना था-

(i) यह बैंक एक पब्लिक लि. कंपनी के रूप में पंजीकृत हो;  (ii) न्यूनतम प्रदत्त पूँजी 100 करोड़ रु. हो, बाद में इसे बढ़ाकर 200 करोड़ कर दिया गया; (iii) इसके शेयर स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हों (iv) बैंक का कामकाज, हिसाब-किताब या लेखा तथा अन्य नीतियाँ भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित विवेकपूर्ण मानकों के अनुरूप हों।

 

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक


प्रथम राष्ट्रीयकरण: 19 जुलाई, 1969 को 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया-

- बैंक ऑफ इंडिया

- इंडियन बैंक

- यूनियन बैंक ऑफ इंडिया

-  बैंक ऑफ बड़ौदा

- बैंक ऑफ महाराष्ट्र

- पंजाब नेशनल बैंक

- इंडियन ओवरसीज़ बैंक

- सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया

- केनरा बैंक

- सिंडीकेट बैंक

- यूनाइटेड कॉमर्शियल बैंक

- इलाहाबाद बैंक

- यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया

-   देना बैंक

दिवतीय राष्ट्रीयकरण: 15 अप्रैल, 1980 को 6 अन्य बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया-

- आंध्र बैंक

- कॉर्पोरेशन बैंक

- न्यू बैंक ऑफ इंडिया

- पंजाब एंड सिंध बैंक

- ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स

- विजया बैंक

अक्टूबर 1993 में न्यू बैंक ऑफ इंडिया का विलय पंजाब नेशनल बैंक में कर दिया गया। वर्तमान में देश में 19 राष्ट्रीयकृत बैंक हैं।
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